जीवन अमूल्य प्यारे , क्यों मुफ्त खो रहा है !!
फंस कर वदी में प्यारे , क्यों मस्त हो रहा है !!
नेकी की खेती करले , क्यों पाप बो रहा है !!
क्यों मोह रूपी बोझा , नाहक ढो रहा है !!
किश्ती तेरी पुरानी , हिकमत से पारकर ले !
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