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सूरज हर शाम को ढल जाता है !


सूरज हर शाम को ढल जाता है !

हर पतझड़ बसंत में बदल जाता है !!

मेरे मन ! मुसीबतों में हिम्मत न हार ! 

समय कैसा भी हो अवश्य निकल जाता है !!

नारी से ही पुरुष का मान होता है !

बिना माली गुलशन वीरान होता है !!

बिन सहारे से कोई जी सकता नहीं !

कभी सहारा भी इंसान का भगवान होता है !!

एक ही पलने में दानी और सोम होते हैं !

कहीं टिकती है नजरें कहीं मूंद लेते हैं !!

फाड़ देते हैं काँटा वसन को मगर !

पड़े धरती के फुल को लोग चूम लेते हैं !!


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