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जब तेरी डोली निकाली जायेगी। बिना मुहरत के उठा ली जायेगी ।।


जब तेरी डोली निकाली जायेगी।
बिना मुहरत के उठा ली जायेगी ।।

उन हकीमों से कहो यूँ बोलकर ।
करते थे दावे किताबें खोलकर ।
ये दवा बिलकुल न खाली जायेगी ।।
जब तेरी......

क्यों गुलों पे हो रहा बुलबुल निसार ।
पीछे है माली खड़ा हो ख़बरदार ।
मार कर गोली गिरा ली जायेगी ।।
जब तेरी......

गर सिकंदर का यहाँ सब रह गया ।
मरते दम लुकमान भी यूँ कह गया ।
ये घडी हरगिज न टाली जायेगी ।।
जब तेरी........

ऐ मुसाफिर क्यों पसरता है यहाँ ।
ये किराये पर मिला तुझको मकाँ।
कोठारी खाली कराली जायेगी ।।
जब तेरी......
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