भजन श्याम सुन्दर का करते रहोगे !
तो संसार सागर से तरते रहोगे !!
कृपा नाथ वेशक मिलेगें किसी दिन !
सत्संग - पथ से गुजरते रहोगे !!
चढ़ोगे सभी के ह्रदय में सदा तुम !
जो अभिमान गिरि से उतरते रहोगे !!
न होगा कभी क्लेश मन को तुम्हारे !
जो अपनी बुराई से डरते रहोगे !!
छलक पड़ेगा कृपा सिन्धु का दिल !
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