सत्य सनातन धर्म में आदि काल से ही जो परम्पराये चली आ रही है , उनका आज के समय में वैज्ञानिक रहस्य होता है । ऋषि मुनियों ने जो परम्पराये मानव जीवन के लिए बनाई । उसका लक्ष्य सम्पूर्ण मानव जीवन के उथान के लिए है । इस पोस्ट में हम माथे पर लगे तिलक के विषय में चर्चा करेगें ।
हिंदू धर्म में तिलक लगाने की परंपरा आदिकाल से चला आ रहा है ! इसमें हल्दी , सिंदूर , केसर ,भस्म और चंदन आदि का प्रयोग होता है!
हमारे शरीर में 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र हैं! इन्हीं में से एक है आज्ञा चक्र , जो माथे के बीच में होता है , और जिस पर तिलक लगाया जाता है ! इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति संपन्न हो जाता है । इसे हम चेतन केंद्र भी कह सकते हैं । समस्त ज्ञान और चेतन का संचालन इसी स्थान से होता है । आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है । इस स्थान को दिव्य नेत्र भी कहते हैं । तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है ।
सुबह उठकर स्नान के बाद माथे पर चंदन का तिलक लगाने से मस्तिष्क ठंडा रहता है , और मस्तिष्क अपना कार्य पूर्ण रूप से अच्छा करता है। इसके अतिरिक्त तिलक सम्मान सूचक भी होता है ।
हिंदू धर्म में तिलक लगाने की परंपरा आदिकाल से चला आ रहा है ! इसमें हल्दी , सिंदूर , केसर ,भस्म और चंदन आदि का प्रयोग होता है!
हमारे शरीर में 7 सूक्ष्म ऊर्जा केंद्र हैं! इन्हीं में से एक है आज्ञा चक्र , जो माथे के बीच में होता है , और जिस पर तिलक लगाया जाता है ! इस चक्र पर ध्यान केंद्रित करने पर साधक का मन पूर्ण शक्ति संपन्न हो जाता है । इसे हम चेतन केंद्र भी कह सकते हैं । समस्त ज्ञान और चेतन का संचालन इसी स्थान से होता है । आज्ञा चक्र ही तृतीय नेत्र है । इस स्थान को दिव्य नेत्र भी कहते हैं । तिलक लगाने से आज्ञा चक्र जागृत होता है ।
सुबह उठकर स्नान के बाद माथे पर चंदन का तिलक लगाने से मस्तिष्क ठंडा रहता है , और मस्तिष्क अपना कार्य पूर्ण रूप से अच्छा करता है। इसके अतिरिक्त तिलक सम्मान सूचक भी होता है ।

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