नवरात्र में माँ दुर्गा के नौ दिनों में नौ रूपों की पूजा अर्चना की जाती है ! माँ दुर्गा के नौ रूप कौन कौन से हैं ? माँ दुर्गा को नवदुर्गा क्यों कहते है ? इस पर चर्चा करेगें !
माँ दुर्गा के नौ रूपों में से एक रूप है शैलपुत्री का !अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा किए गए यज्ञ में , अपने पति भगवान शिव का अपमान होने पर , माँ सती ने हवन कुंड में आत्म दाह कर लिया ! और अगले जन्म में शैलराज हिमालय के घर जन्म लिया ! शैलराज हिमालय के पुत्री होने के कारन उनका नाम शैलपुत्री पड़ा ! मां शैलपुत्री नंदी की सवारी करती हैं ! दायें हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है !
मां दुर्गा का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी !माँ शैलपुत्री ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की । इस प्रकार कठिन तपस्या के कारण मां शैलपुत्री को तपस्या चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया ।ब्रह्मचारिणी का कोई वाहन नहीं है । माता के दाएं हाथ में जाप माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है ।
मां दुर्गा का तीसरा रूप है देवी चंद्रघंटा । माता ब्रह्मचारिणी की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता से विवाह किया । विवाह के पश्चात माता के शीश पर अर्द्ध चन्द आ गया । जो कि एक घंटे की तरह प्रतीत होता है । इसी वजह से माता का नाम देवी चंद्रघंटा पड़ा ।देवी चंद्रघंटा की सवारी बाघ है ।
माँ दुर्गा का चौथा रूप है कुष्मांडा । कुष्मांडा तीन शब्दों से मिल कर बना है ! कु अर्थात छोटा , ऊष्मा अर्थात ऊर्जा और अंडा शब्दों से मिलकर बना है ।माता ने अपनी मनमोहक मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना एक छोटे से अंडे के रूप में की थी । इसीलिए माता का नाम कुष्मांडा पड़ा ।अष्ट भुजा धारी माता कुष्मांडा के चार हाथों में अस्त्र-शस्त्र होते हैं तथा अन्य चार हाथों में कमल कमंडल जाप माला तथा अमृत का घड़ा होता है ।
मां भगवती का पांचवा रूप स्कन्द माता का है । भगवान स्कन्द , जिसे कुमार कार्तिके के नाम से भी जाना जाता है । देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे । स्कन्द भगवान की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस रूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है । चार भुजा धारी स्कन्द माता शेर की सवारी करती हैं ।और माँ के गोद में कार्तिके जी बैठे हैं । माँ दुर्गा का छठा रूप का नाम है कात्यायिनी । विश्व प्रसिद्ध महा ऋषि कत्यायन ने कठिन उपासना की । उनकी इच्छा थी कि उनको पुत्री प्राप्त हो । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनके के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया । कत्यायन ऋषि के घर जन्म लेने के कारण देवी कात्यायनी कहलायीं ।
माँ दुर्गा का सातवां रूप है कालरात्रि ।असुर रक्तबीज के संहार करने के लिए । माँ दुर्गा ने अपनी स्वर्ण छवि से कालरात्रि माता की उत्पत्ति की । मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध किया । तब मां कालरात्रि ने रक्तबीज का सारा खून जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया। ताकि उसकी उत्पत्ति दुबारा ना हो पाए ।
माँ दुर्गा का आठवाँ शक्ति का नाम है महागौरी । माँ ब्रम्ह्चरिणी ने भगवान शिव की प्राप्ति के लिए कठोर तप किया । तब उनका शरीर बहुत दुर्बल और काला हो गया था । शिवजी के प्रसन्न होने के पश्चात माता ने गंगा में स्नान किया ।गंगा में स्नान करने से मां का रूप अत्यधिक सुंदर एवं गोरा हो गया । इसी कारण माता का नाम महागौरी पड़ा । मां महागौरी नंदी की सवारी करती है । चार भुजा धारी माता की एक हाथ में त्रिशूल एवं दूसरे हाथ में डमरू होता है ।
माँ दुर्गा की नवी शक्ति है सिद्धीदात्री । जैसे कि नाम से ही स्पष्ट है मां अष्ट सिद्धियों की स्वामी है एवं अपने भक्तों को ही सिद्धियां देती है पुराणों के अनुसार शिव जी ने सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री की तपस्या की । इन्ही सिद्धियों के पश्चात भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ । और भगवान शिव अर्धनारेश्वर के नाम से जाने गए । मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती है ।
नवरात्रि के 9 दिन में प्रत्येक दिन माता के एक रूप की आराधना की जाती है । नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है । दूसरे दिन माँ ब्रह्मचरणि की पूजा होती है । तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं । चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा होती है । पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है । छठें दिन माँ कत्यायिनी की पूजा होती है । एवं सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है । एवं आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है । और नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है । तो ये था मां दुर्गा के नौ रूपों की कहानी । हम कामना करते हैं कि मां दुर्गा की कृपा सभी पर बनी रहे ।
माँ दुर्गा के नौ रूपों में से एक रूप है शैलपुत्री का !अपने पिता दक्ष प्रजापति द्वारा किए गए यज्ञ में , अपने पति भगवान शिव का अपमान होने पर , माँ सती ने हवन कुंड में आत्म दाह कर लिया ! और अगले जन्म में शैलराज हिमालय के घर जन्म लिया ! शैलराज हिमालय के पुत्री होने के कारन उनका नाम शैलपुत्री पड़ा ! मां शैलपुत्री नंदी की सवारी करती हैं ! दायें हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है !
मां दुर्गा का दूसरा रूप है ब्रह्मचारिणी !माँ शैलपुत्री ने भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की । इस प्रकार कठिन तपस्या के कारण मां शैलपुत्री को तपस्या चारिणी अर्थात ब्रह्मचारिणी नाम से जाना गया ।ब्रह्मचारिणी का कोई वाहन नहीं है । माता के दाएं हाथ में जाप माला और बाएं हाथ में कमंडल होता है ।
मां दुर्गा का तीसरा रूप है देवी चंद्रघंटा । माता ब्रह्मचारिणी की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने माता से विवाह किया । विवाह के पश्चात माता के शीश पर अर्द्ध चन्द आ गया । जो कि एक घंटे की तरह प्रतीत होता है । इसी वजह से माता का नाम देवी चंद्रघंटा पड़ा ।देवी चंद्रघंटा की सवारी बाघ है ।
माँ दुर्गा का चौथा रूप है कुष्मांडा । कुष्मांडा तीन शब्दों से मिल कर बना है ! कु अर्थात छोटा , ऊष्मा अर्थात ऊर्जा और अंडा शब्दों से मिलकर बना है ।माता ने अपनी मनमोहक मुस्कान से ब्रह्मांड की रचना एक छोटे से अंडे के रूप में की थी । इसीलिए माता का नाम कुष्मांडा पड़ा ।अष्ट भुजा धारी माता कुष्मांडा के चार हाथों में अस्त्र-शस्त्र होते हैं तथा अन्य चार हाथों में कमल कमंडल जाप माला तथा अमृत का घड़ा होता है ।
मां भगवती का पांचवा रूप स्कन्द माता का है । भगवान स्कन्द , जिसे कुमार कार्तिके के नाम से भी जाना जाता है । देवासुर संग्राम में देवताओं के सेनापति बने थे । स्कन्द भगवान की माता होने के कारण मां दुर्गा के इस रूप को स्कंदमाता के नाम से जाना जाता है । चार भुजा धारी स्कन्द माता शेर की सवारी करती हैं ।और माँ के गोद में कार्तिके जी बैठे हैं । माँ दुर्गा का छठा रूप का नाम है कात्यायिनी । विश्व प्रसिद्ध महा ऋषि कत्यायन ने कठिन उपासना की । उनकी इच्छा थी कि उनको पुत्री प्राप्त हो । उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर मां भगवती ने उनके के घर पुत्री के रूप में जन्म लिया । कत्यायन ऋषि के घर जन्म लेने के कारण देवी कात्यायनी कहलायीं ।
माँ दुर्गा का सातवां रूप है कालरात्रि ।असुर रक्तबीज के संहार करने के लिए । माँ दुर्गा ने अपनी स्वर्ण छवि से कालरात्रि माता की उत्पत्ति की । मां दुर्गा ने रक्तबीज का वध किया । तब मां कालरात्रि ने रक्तबीज का सारा खून जमीन पर गिरने से पहले ही पी लिया। ताकि उसकी उत्पत्ति दुबारा ना हो पाए ।
माँ दुर्गा का आठवाँ शक्ति का नाम है महागौरी । माँ ब्रम्ह्चरिणी ने भगवान शिव की प्राप्ति के लिए कठोर तप किया । तब उनका शरीर बहुत दुर्बल और काला हो गया था । शिवजी के प्रसन्न होने के पश्चात माता ने गंगा में स्नान किया ।गंगा में स्नान करने से मां का रूप अत्यधिक सुंदर एवं गोरा हो गया । इसी कारण माता का नाम महागौरी पड़ा । मां महागौरी नंदी की सवारी करती है । चार भुजा धारी माता की एक हाथ में त्रिशूल एवं दूसरे हाथ में डमरू होता है ।
माँ दुर्गा की नवी शक्ति है सिद्धीदात्री । जैसे कि नाम से ही स्पष्ट है मां अष्ट सिद्धियों की स्वामी है एवं अपने भक्तों को ही सिद्धियां देती है पुराणों के अनुसार शिव जी ने सिद्धियों की प्राप्ति के लिए मां सिद्धिदात्री की तपस्या की । इन्ही सिद्धियों के पश्चात भगवान शिव का आधा शरीर देवी का हुआ । और भगवान शिव अर्धनारेश्वर के नाम से जाने गए । मां सिद्धिदात्री कमल पर विराजमान होती है ।
नवरात्रि के 9 दिन में प्रत्येक दिन माता के एक रूप की आराधना की जाती है । नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है । दूसरे दिन माँ ब्रह्मचरणि की पूजा होती है । तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा करते हैं । चौथे दिन माँ कुष्मांडा की पूजा होती है । पांचवे दिन देवी स्कंदमाता की पूजा की जाती है । छठें दिन माँ कत्यायिनी की पूजा होती है । एवं सातवें दिन माँ कालरात्रि की पूजा की जाती है । एवं आठवें दिन महागौरी की पूजा होती है । और नवें दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा होती है । तो ये था मां दुर्गा के नौ रूपों की कहानी । हम कामना करते हैं कि मां दुर्गा की कृपा सभी पर बनी रहे ।

Thank you... ConversionConversion EmoticonEmoticon