सिख धर्म के दसवें गुरु ,
गुरु गोबिंद सिंह महान पराक्रमी , ज्ञानी और महान संत थे ! उनके महानता की कहानी
तो विश्व विद्दित है ! उनके वीर सपूत भी उन्ही के रास्ते पर चल कर देश धर्म के लिए
अपने आप को न्योछावर कर दिया , लेकिन कभी झुका नहीं !
आनंदपुर के युद्ध में गुरु गोबिंद सिंह और
उनका परिवार एक दुसरे से विछाड गया ! गुरु गोबिंद सिंह के दो पुत्र अजित सिंह और
जुझार सिंह से तो मुलाक़ात हो गई परन्तु दोनों छोटे पुत्र फ़तेह सिंह जिनकी आयु पांच
वर्ष दस माह थी और जोरावर सिंह जिनकी आयु सात वर्ष ग्यारह माह थी और माता गुजरी
देवी के साथ विछुड़ गए !
गंगू नामक व्यक्ति जिसने बीस वर्षो तक गुरु
गोबिंद सिंह के यहाँ रसोइये का काम किया था !वह दोनों बच्चों और गुजारी देवी को
अपने घर ले गया ! गंगू ने लोभ वश अपना इमान बेच बैठा और उसने माता गुजरी के सामानों
में कुछ सोने के मुहरें थी , जिसे चुरा लिया ! और इनाम पाने के लालच में राजा के
सिपाहियों को बता दिया कि गुरु गोबिंद सिंह के दो पुत्र और उनकी माता गुजरी देवी
हमारे घर में छुपे हैं !
सिपाहियों ने दोनों बच्चों और माता गुजरी देवी
को बंदी बना लिया ! एक रात जेल में रख कर दुसरे दिन सरहिन्द के नबाब के पास ले गए
! रात में माता गुजरी देवी बच्चों को गुरु तेग बहादुर और गुरु गोबिंद सिंह की
वीरता की कहानियाँ सुनाती रही ! रात भर धर्म पर अडिग रहने की शिक्षा दी ,बोली धर्म
परिवर्तन करने को कहेगा , किसी परिस्थिति में धर्म का परिवर्तन नहीं करना !
चारो ओर से शत्रुओं से घिरे होने पर भी नन्हे
शेरो ने घबड़ाया नही ! इनकी निर्भीकता को देख कर सभी दांतों तले उंगली दबाने लगे ! शारीर
पर केशरी वस्त्र , पगड़ी और कृपाण धारण किये नन्हे योद्धाओ को देख सब दंग रह गए !
नबाब ने कहा तुम्हे छोड़ दिया जायेगा ,मगर एक शर्त है –तुम अपना धर्म छोड़ कर
मुसलमान बन जाओ ! नबाब ने लालच और प्रलोभन देकर पासा फेंका पर नन्हे शेरो ने कहा
हमें अपना धर्म प्राणों से भी प्यारा है ! जिस धर्म के लिए हमारे पूर्वजो ने अपने
प्राणों की आहुति दी है , उसे हम तुम्हारी लालच भरी बातों में आकर छोड़ दें ,यह कभी
नहीं हो सकता ! नबाब ने कहा तुमने दरबार का अपमान किया है , तुम्हे कड़ी सजा दे सकते हैं , पर एक अवसर फिर से देते हैं,अभी भी समय है यदि जिंदगी चाहते हो तो मुसलमान बन जाओ !
नन्हें वीर गरज कर बोल उठे हम उस गुरु तेग बहादुर के पोते हैं , जो धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान हो गए ! हम उन गुरु गुबिंद सिंह के पुत्र हैं जिनका नारा है " चिड़ियों से मैं बाज़ तदाऊँ ,सवा लाख से एक लड़ाऊं !!'' जिनका एक सिपाही तेरे सवा लाख गुलामों को धूल चटा देता है ।जिसका नाम सुनते ही तेरी सलतनत थरथर काँपने लगाती है । तू हमें मृत्यु का भय दिखाता है ।हम फिर से कहते हैं , कि हमारा धर्म हमे प्राणों से भी प्यारा है , हम प्राण त्याग सकते हैं , परन्तु अपना धर्म नहीं त्याग सकते ।
दीवान ने बालकों से पूछा यदि तुम्हे छोड़ दें तो तुम क्या करोगे ? बालक जोरावर सिंह ने कहा हम सेना इकट्ठी करेगें और अत्याचारी मुगलों को इस देश से खदेड़ने के लिए युद्ध करेगें । हार शब्द हमारे जीवन में नहीं है , हम हारेगें नहीं या तो विजयी होंगे या शहीद होगें ।
नबाब ने कहा ये बालक मुग़ल शासन के दुश्मन हैं और इस्लाम भी यह स्वीकार नहीं करता , अतः जिन्दा दीवार में चुनवा दिया जाये । दिल्ली के सरकारी जल्लादों के हवाले बालकों को सुपुर्द कर दिया गया । दीवार कानों तक पहुँची , जोरावर सिंह ने अंतिम बार छोटे भाई फ़तेह सिंह को देख आंसू छालक उठे । नबाब समझा कि बालक मौत से डर गए हैं , इस लिए फिर से कहा सजा माफ़ कर दी जायेगी मुसलमान बन जाओ ।
जोरावर सिंह ने जोर से कहा मुर्ख काजी मैं मौत से नहीं डर रहा हूँ ! मेरा भाई मेरे बाद आया संसार में और धर्म के लिए पहले शहीद हो रहा है । मुझे बड़ा भाई होने पर यह सौभाग्य नहीं मिला । इसलिए रोना आ गया । इन बातो को सुन सभी दंग रह गए । दीवार पूरी हुई और दोनों वीर उसमे समा गए । कुछ समय बाद दीवार गिरा दिया गया ,बालक बेहोश पड़े थे । परन्तु अत्याचारियों ने उसी स्थिति में उनकी ह्त्या कर दी !
संसार के किसी अन्य देश के इतिहास में ऐसे दो बालको की निर्मम हत्या का वर्णन नहीं मिलेगा । धन्य हैं धर्म निष्ट बालक धन्य हैं भारत के सपूत ।
नन्हें वीर गरज कर बोल उठे हम उस गुरु तेग बहादुर के पोते हैं , जो धर्म की रक्षा के लिए कुर्बान हो गए ! हम उन गुरु गुबिंद सिंह के पुत्र हैं जिनका नारा है " चिड़ियों से मैं बाज़ तदाऊँ ,सवा लाख से एक लड़ाऊं !!'' जिनका एक सिपाही तेरे सवा लाख गुलामों को धूल चटा देता है ।जिसका नाम सुनते ही तेरी सलतनत थरथर काँपने लगाती है । तू हमें मृत्यु का भय दिखाता है ।हम फिर से कहते हैं , कि हमारा धर्म हमे प्राणों से भी प्यारा है , हम प्राण त्याग सकते हैं , परन्तु अपना धर्म नहीं त्याग सकते ।
दीवान ने बालकों से पूछा यदि तुम्हे छोड़ दें तो तुम क्या करोगे ? बालक जोरावर सिंह ने कहा हम सेना इकट्ठी करेगें और अत्याचारी मुगलों को इस देश से खदेड़ने के लिए युद्ध करेगें । हार शब्द हमारे जीवन में नहीं है , हम हारेगें नहीं या तो विजयी होंगे या शहीद होगें ।
नबाब ने कहा ये बालक मुग़ल शासन के दुश्मन हैं और इस्लाम भी यह स्वीकार नहीं करता , अतः जिन्दा दीवार में चुनवा दिया जाये । दिल्ली के सरकारी जल्लादों के हवाले बालकों को सुपुर्द कर दिया गया । दीवार कानों तक पहुँची , जोरावर सिंह ने अंतिम बार छोटे भाई फ़तेह सिंह को देख आंसू छालक उठे । नबाब समझा कि बालक मौत से डर गए हैं , इस लिए फिर से कहा सजा माफ़ कर दी जायेगी मुसलमान बन जाओ ।
जोरावर सिंह ने जोर से कहा मुर्ख काजी मैं मौत से नहीं डर रहा हूँ ! मेरा भाई मेरे बाद आया संसार में और धर्म के लिए पहले शहीद हो रहा है । मुझे बड़ा भाई होने पर यह सौभाग्य नहीं मिला । इसलिए रोना आ गया । इन बातो को सुन सभी दंग रह गए । दीवार पूरी हुई और दोनों वीर उसमे समा गए । कुछ समय बाद दीवार गिरा दिया गया ,बालक बेहोश पड़े थे । परन्तु अत्याचारियों ने उसी स्थिति में उनकी ह्त्या कर दी !
संसार के किसी अन्य देश के इतिहास में ऐसे दो बालको की निर्मम हत्या का वर्णन नहीं मिलेगा । धन्य हैं धर्म निष्ट बालक धन्य हैं भारत के सपूत ।

1 comments:
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