भगवान शब्द का अर्थ जितेन्द्रिय है , अर्थात
जो अपने इन्द्रियो पर विजय प्राप्त कर ले !
आम भाषा में भगवान शब्द का अर्थ ईश्वर
, परमात्मा , सर्वशक्ति मान , सृष्टि के रचयिता ,पालनहार और इसका संहार करने वाला
, जिसके नाम जपने से , ध्यान लगाने से वह प्रसन्न हो जाते हैं ,और अपने भक्तों को
भवसागर से पार निकालते हैं !
भगवान शब्द संस्कृत के भगवत शब्द से बना है , जिसने पांचो इन्द्रियों पर
विजय प्राप्त कर ली है ! और जिसकी पकड़ पंचतत्वों पर है , उसे भगवान कहते हैं !
भगवान शब्द के लिए विष्णु पुराण में लिखा गया है :-
“ऐश्वर्यस्य समग्रस्य वीर्यस्य यशसः श्रियः ।
ज्ञानवैराग्ययोश्चैव षण्णां भग इतीरणा ।।”
अर्थात , समस्त ऐश्वर्य ,धर्म , यश ,
सम्पति , ज्ञान , और वैराग्य इन छः बातों को भग कहते हैं ! इससे युक्त पुरुष को
भगवान कहते हैं ! और इससे युक्त स्त्री को भगवती कहते हैं !
भगवान शब्द का प्रयोग विष्णु और शिव
के अवतार के लिए भी किया जाता है !
जो आत्माएं पांचो इन्द्रियों और
पंचतत्व के जाल से मुक्त हो गई हो , वह भगवान कही गई इसी तरह कोई स्त्री मुक्त हो
गई हो ,तो उसे भगवती कहते हैं !भगवती शब्द का प्रयोग माँ दुर्गा के लिए किया जाता
है !
भगवान शब्द का संधि विच्छेद :-
भ + ग + व + आ + न
अर्थात ,
भ = भूमि
ग = गगन
व = वायु
आ = आग यानि अग्नि
न = नीर
भगवान शब्द पांच तत्वों से मिलकर बना है ! ये पांच तत्वो (भूमि , गगन , वायु , अग्नि , नीर ) को देवता
कहते है ! अर्थात जो हमें देता है ! जिसने हमें जीवन दिया ! जिसके वजह से हम जीवित
हैं ! जिसके वजह से जीवन संभव है !
खुदा खुद को कहते हैं ! इस तथ्य को
भगवान बुद्ध ने सिद्ध किया था ! वह एक सामान्य मानव ही थे , जिन्होंने संयम से
समाधि तक का रास्ता तय किया था ! इस वजह से पुरे विश्व में वह भगवान बुद्ध के रूप
में पूजे जाते हैं !

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