आज कल के भागमभाग भरी जिंदगी में दिशा शूल का ध्यान नहीं रखा जाता है । ( दिशाशूल अर्थात, इस दिन इन दिशाओ की ओर यात्रा नहीं करनी चाहिये !) जब की ध्यान रखना चाहिए ! हमारे बड़े बुजुर्ग इसका खास ध्यान रखते थे । किस दिन हमें किस दिशा में यात्रा करनी है !और किस दिन हमें किस दिशा की यात्रा नहीं करनी है ।
हमारे सत्य सनातन धर्म के जयतिष शास्त्र में मनुष्य जीवन के हर परिस्थितियों के लिए विवरण किया गया है । हम सब यदि थोड़ा भी समझ जाये तो जीवन में उत्पन्न होने वाले बहुत से समस्याओ से बच सकते हैं । और अपना जीवन सुखी बना सकते हैं । तो आइये जानते है इसके विषय में !
किस दिन किस दिशा में नहीं जानी चाहिए !
किस दिन किस दिशा में नहीं जानी चाहिए इस पर हमारे यहाँ एक कहावत कही जाती हैं -
सोम सनिचर पूरब न चालू ,
मंगल बुध उत्तर दिशि कालू ,
रवि शुक्र जो पश्चिम जाये ,
हानि होय पथ सुख नहीं पाये ,
बिफे दक्खिन करे पयान ,
फिर नहीं समझो ताको आन ।
अर्थात,
* सोमवार और शनिवार को पूरब दिशा की यात्रा शुभ नहीं मानी जाती है ।
* मंगलवार और बुद्धवार को उत्तर दिशा की यात्रा न करें ।
* रविवार और शुक्रवार को पश्चिम दिशा में यात्रा करने से हानि होती है और यात्रा का सुख नहीं मिलाता ।
* वृहस्पतिवार को दक्षिण की यात्रा न करें ।
और,
* सोमवार और वृहस्पतिवार को आग्नेय कोण ( पूरब - दक्षिण ) की यात्रा नहीं करनी चाहिए ।


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