आजादी के पहले के आन्दोलन और आज के आन्दोलनो का मतलब अलग है !
शब्दांतर नहीं है ! अर्थान्तर है ! आजादी के पहले के आन्दोलन देशहीत के लिए हुआ
करते थे ! गुलामी से आजादी के लिए हुआ करते थे ! देश में एकता के लिए हुआ करते थे
! परन्तु आज-कल का आन्दोलन स्वार्थसिद्धि के लिए होता है ! किसी विशेष समुदाय के
लिए होता है ! किसी विशेष स्थान के लिए होता है ! हर विशेष के पीछे एक विशेष
व्यक्ति होता है ! हर विशेष व्यक्ति के पीछे एक विशेष राजनितिक तंत्र होता है ! जिसका
खुद का स्वार्थ होता है !
वे लोग भी थे ! जिन्होंने सीने को ढाल बनाया ,
फांसी के फंदे को गले का हार बनाया , अपनो को अपनाया नहीं ...देश के लिए ! कोई
स्वार्थ नहीं , कोई भेद नहीं , कोई जाति नहीं , कोई धर्म नहीं ! सब एक थे ! सबका
एक ही निशाना था ! गुलाम भारत को आजाद कराना ! वे आंदोलनकारी थे थे ! वे
क्रांतिकारी थे ! खुद को आहुति करना तो उनके लिए खेल था !
साँस का हर सुमन है वतन के लिए ,
जिंदगी ही हवन है वतन के लिए ,
कह गई फांसियों में फंसी गर्दनें ,
यह हमारा नमन है वतन के लिए !!

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