अपना समय व्यर्थ न खोएं – आपका समय इतना बहुमूल्य है कि, समय देकर आप दुनियां की चीजें प्राप्त कर सकते है , लेकिन दुनियां की सब चीजें न्योछावर करके भी आप बीते हुए आयुष्य का सौवां हिस्सा भी वापस नहीं पा सकते ! पचास –साठ –अस्सी साल देकर जो कुछ एकत्र किया ,वह सब का सब आप दे दें ,फिर भी पचास –साठ घंटे तो क्या पांच मिनट भी आप अपना आयुष्य नहीं बढ़ा सकते ! इसलिए अमूल्य समय को व्यर्थ न गवाएं ! किसी के आंसू पोछने में , ईश्वर प्राप्ति में समय लगायें !
गपशप , विषयभोग , मित्रो के साथ
घुमने – फिरने में , कामनाओं की पूर्ति में , हास्य – विलास में समय नष्ट न करें !
समय को बर्बाद करने वाला स्वयं बर्बाद हो जाता है !
स्वास्थ्य नहीं
खोना चाहिए- सुखी जीवन के लिए शारीर और मन की स्वस्थता जरुरी है ! मानव शारीर पुनः –पुनः
प्राप्त नहीं होता ,इसलिए स्वास्थ्य की रक्षा करते हुए पुण्य का अर्जन करें !
शारीर जितना निरोग , स्वच्छ व पवित्र
रहेगा उतना ही, आत्मा का प्रकाश इसमे अधिक प्रकाशित होगा ! यदि दर्पण ही ठीक नहीं
होगा तो प्रतिबिम्ब कैसे दिखाई देगा ! यदि नीव ही कमजोर हो तो ईमारत कैसे बुलंद
होगी ! “शरीर माद्दम खलु
धर्मसाधनं’’
शारीर धर्म का साधन है
!स्वस्थ्य शरीर रखने की कला जो जानता है , वह बार – बार बीमार का शिकार नहीं होता
!
संयम नहीं
खोना चाहिए –
जिसके जीवन में संयम नहीं
है ,वह पशु से भी गया-गुजरा हो जाता है !संयमहीन मानव किसी भी क्षेत्र में सफल
नहीं हो पाता ,न कोई बड़े का काम कर पाता ! पशुओ के लिए चाबुक होता है ,परन्तु
मनुष्य के लिए बुद्धि की लगाम है ! सरिता भी दो किनारों से बधी रहती है ,और सागर
तक पहुचती है !

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