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ऐसी बाणी बोलिए


   एक राजकुमार बड़ा ही घमंडी और उदंड स्वभाव का था !उसके मुंह से हमेशा कठोर वचन ही निकलते थे !सभी उसके व्यवहार से बहुत परेशान थे ! विवस होकर राजा ने संतो के शरण में जाकर अपनी परेशानी बताई !संतो ने कहा “राजकुमार !सामने जो पौधा है ,उसकी पत्तियां तोड़कर लाओ  !’’ महात्मा ने कहा -इसे खालो ! ज्यो ही पत्तियां मुहँ में डाली ,अति कड़वाहट के कारन तुरंत थूक दिया और जाकर उस पौधे को उखाड़कर फेक दिया !राजकुमार ने कहा – “उस पौधे की पत्तियां बहुत कड़वी हैं ,वह किसी काम का नाही है , इसलिए मैंने उसे उखड दिया  !


     संत हंसते हुए बोले – राजकुमार !तुम भी तो लोगो को कड़वे बचन बोलते हो !अगर वे भी तुम्हारे दुर्व्यवहार से क्षुब्ध होकर वही करे ,जो तुमने इस पौधे के साथ किया है तो ,क्या परिणाम होगा ? 
  देखो बेटा !  मीठी और हितकारी वाणी दूसरो को आनंद ,शांति और प्रेम का दान करती हैं ,और स्वयं में आनंद ,शांति और प्रेम को खीच कर लाती हैं !इसलिए मुख से ऐसा शब्द कभी मत निकालो जो किसी का दिल दुखाये और अहित करे !

  राजकुमार को अपनी भूल का एहसास हुआ ,उस दिन  से अपना व्यवहार बदल दिया और प्रजाजनों का प्रिय बनकर यश का भागी हुआ !!

  ऐसी वाणी बोलिये ,मन का आपा खोय !
 औरन को शीतल करे ,आपहुं शीतल होय !!

 कागा काको धन हरै ,कोयल काको देत !
 मीठा शब्द सुनाय के ,जग अपनो करिलेत !! 


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